पोस्टमार्टम को लेकर हुआ विवाद, मौके पर पहुंची पुलिस

ग्वालियरसुजान सिंह। जयारोग्य चिकित्सालय में उपचार के दौरान एक बच्चे की मौत के बाद पोस्टमार्टम कराने को लेकर चिकित्सकों और परिजनों के बीच विवाद हो गया। परिजन बच्चे के शव को बाहर स्ट्रेचर पर करीब चार घण्टे तक रखे रहे। वे पोस्टमार्टन कराने को तैयार नहीं थे। चिकित्सकों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद परिजन एसडीएम के पास पहुंचे और बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को घर लेकर चले गए।

गोल पहाड़िया निवासी दीपक शर्मा का आठ वर्षीय बेटा सागर शर्मा विगत 15 जून को पतंग उठाते समय छत से गिर गया था। उपचार के लिए परिजन उसे जयारोग्य अस्पताल के ट्रॉमा सेन्टर लेकर पहुंचे थे, जहां से बच्चे को कमलाराजा अस्पताल भेजा गया और वहां से बच्चे को सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया, जहां उसका आॅपरेशन किया गया, लेकिन आॅपरेशन के तीन दिन बाद रविवार को दोपहर करीब एक बजे बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मृत्यु के बाद चिकित्सकों ने परिजनों से पोस्टमार्टम कराने की बात कहते हुए शव को विच्छेदन गृह ले जाने के लिए कहा, लेकिन परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराने पर अड़ गए, जबकि चिकित्सकों का कहना था कि बच्चे की एमएलसी हुई है, इसलिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी है। अगर पोस्टमार्टम नहीं कराना चहते हो तो एसडीएम से अनुमति लेकर आना होगी। इस बात को लेकर परिजन बच्चे के शव को लेकर करीब चार घण्टे तक पत्थर वाले भवन के बाहर स्ट्रेचर पर रखे खड़े रहे। परिजनों को एकत्रित होता देख चिकित्सकों ने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। इसके बाद बच्चे के पिता एसडीएम महीप तेजस्वी के पास पहुंचे और पूरी बात बताई। इस पर एसडीएम ने थाने पर सम्पर्क कर थाना प्रभारी को बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव परिजनों को सौंपने की बात कही। इसके बाद परिजनों ने जब थाना प्रभारी से सम्पर्क किया तो उन्होंने शव को शव विच्छेदन गृह ले जाकर लिखा-पढ़ी कराने की बात कही। इस पर परिजन बच्चे के शव को लेकर शव विच्छेदन गृह पहुंचे तो वहां चिकित्सक मौजूद नहीं थे। करीब एक घण्टे तक जब चिकित्सक वहां नहीं पहुंचे तो परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सहित चिकित्सक पहुंचे और लिखा-पढ़ी कर शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद परिजन शाम लगभग 6.30 बजे शव लेकर घर चले गए।

चिकित्सकों पर लगाए लापरवाही के आरोप

बच्चे के चाचा करन शर्मा ने बताया कि शनिवार की दोपहर लगभग 3 बजे बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी, जिस पर वह चिकित्सकों को बुलाने के लिए पहुंचे, लेकिन वार्ड में सिर्फ नर्स ही उपस्थित थी। शाम 7 बजे तक चिकित्सक नहीं आए, जिस कारण बच्चे की मृत्यु हुई है।