अयोध्या विवाद : पूजा करना मौलिक अधिकार है, कोर्ट करे विचार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने अयोध्या मसले पर सुनवाई शुरू कर दी है। जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं। इस मामले को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि पूजा का अधिकार मौलिक अधिकार के दायरे में आता है इसलिए उस पर सबसे पहले कोर्ट विचार करें।

जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुवाद का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उसने कहा कि मूल ऐतिहासिक दस्तावेज संस्कृत, पाली, ऊर्दु, अरबी और दूसरी भाषाओं में हैं। ऐसे में सुन्नी वक्फ बोर्ड और बाबरी कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से अभी सुनवाई शुरू नहीं करने की मांग की है। 

आपको बता दें कि इस सुनवाई से ठीक पहले शिया वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में अर्जी लगाकर मामले में नया पेंच डाल दिया है। अर्जी में शिया बोर्ड ने विवाद में पक्षकार होने का दावा किया है। शिया वक्फ बोर्ड ने 70 साल बाद 30 मार्च 1946 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें मस्जिद को सुन्नी वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी करार दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ गठित की है। यह पीठ अयोध्या भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं और विवादित भूमि के मालिकाना हक पर फैसला सुनाने के लिए सुनवाई करेगी।

अपनी हलफनामे में शिया वक्फ बोर्ड ने कहा है कि मीर बकी ने राम मंदिर को तोडकर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया था। पहली बार किसी मुस्लिम संगठन ने आधिकारिक तौर पर माना कि विवादित स्थल पर राम मंदिर था। गौरतलब है कि मंगलवार को शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। शिया बोर्ड का सुझाव है कि विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाना चाहिए। इस मामले में रामजन्म भूमि मंदिर ट्रस्ट और सुन्नी वक्फ बोर्ड पक्षकार हैं, क्योंकि विवादित स्थल पर अधिकार को लेकर शिया बोर्ड 1946 में सुन्नी बोर्ड से केस हार चुका है।

विदित को कि अर्जी में कहा गया है कि अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थल से एक उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जा सकती है। शिया वक्फ बोर्ड ने हलफनामे में कहा कि दोनों धर्मस्थलों के बीच की निकटता से बचा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों ही के द्वारा लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल एक-दूसरे के धार्मिक कार्यों में बाधा की वजह बन सकता है। शिया वक्फ बोर्ड ने यह भी कहा कि इस मामले से सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई संबंध नहीं है, क्योंकि मस्जिद एक शिया संपत्ति थी। इसलिए मामले के शांतिपूर्ण निपटारे के लिए इसके अन्य पक्षों से बातचीत का हक केवल शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड उत्तर प्रदेश को है।