कार्यालय छोड़ने के एक माह पहले राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज की दो दया याचिकाएं

नई दिल्‍ली। कार्यालय छोड़ने के एक माह पहले राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दो मामलों में दया याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही राष्‍ट्रपति द्वारा अब तक खारिज की गयी कुल दया याचिकाओं की संख्‍या 30 हो गयी। मई के अंतिम सप्‍ताह में ये याचिकाएं खारिज की गयीं।

पहला मामला 2012 में इंदौर में एक चार वर्षीय लड़की के रेप व मर्डर का है जिसमें तीन अपराधी हैं और दूसरा एक कैब चालक और उसके सहयोगी द्वारा पुणे में एक आइटी प्रोफेशनल के गैंगरेप व मर्डर का है। ये दोनों मामले अप्रैल और मई में राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। इंदौर केस में तीन दोषी बाबू उर्फ केतन (अपराध के वक्‍त 22 वर्ष), जितेंद्र उर्फ जीतू (20) व देवेंद्र उर्फ सनी (22) को चार वर्ष की बच्‍ची के अपहरण, दुष्‍कर्म और हत्‍या मामले में दोषी पाया गया।

पुणे केस में 2007 में 22 वर्षीय विप्रो कर्मचारी के दुष्‍कर्म व हत्‍या के दोषी पुरुषोत्‍तम दशरथ बोराटे व प्रदीप यशवंत कोकाडे को मृत्‍युदंड दिया गया। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा खारिज की गयी दया याचिकाओं में 26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब, 2001 संसद हमले का दोषी अफजल गुरु और 1993 मुंबई आतंकी हमले के दोषी याकूब मेनन के मामले शामिल हैं।