गोरखालैंड अलग होने की मांग को लेकर जीजेएम कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प


दार्जिलिंग।
गोरखालैंड अलग होने की मांग को लेकर रविवार को भी दार्जिलिंग में बंद जारी है। वहीं सरकार ने शनिवार को हुई हिंसक घटनाओं को देखते हुए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। आपको यह बता दें कि इस आंदोलन को कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से गैरकानूनी करार दिया जा चुका है। रविवार को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हिंसक घटनाएं थम नहीं रही और सुरक्षा बलों के साथ झड़प में दो गोरखा समर्थकों की मौत हो गई थी जबकि इंडियन रिजर्ब बल  के सहायक कमांडेंट किरन तमांग समेत 35 सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक घायल हो गए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पांच वाहनों और एक पुलिस चौकी में आग लगाई।

अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 11 दिनों से अशांत चल रहे दार्जिलिंग में रविवार को जीजेएम कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कई जगह झड़प देखने को मिली। दार्जिलिंग में  कुछ वर्षों के अंतराल के बाद आठ जून से फिर से शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन में रविवार को पहली मौत हुई।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर पेट्रोल बम फेंके, पथराव किया और बोतल फेंके। इस पर सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे और भीड़ को तितर—बितर करने के लिए लाठी चार्ज का सहारा लेना पड़ा। हालात पर नियंत्रण के लिये सेना की टुकड़ियां तैनात की गई हैं और दार्जिलिंग और कुर्सियांग समेत हिंसा प्रभावित पहाड़ी जिले के कई क्षेत्रों में सेना ने फ्लैग मार्च किया। साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर आंदोलन को प्रोत्साहित करने के आरोप लगाए और दावा किया कि इसमें गहरा षडयंत्र है। बहरहाल हिंसक आंदोलन के लिए उन्होंने भाजपा पर सीधे आरोप नहीं लगाए और दावा किया कि इसे पूर्वोत्तर के उग्रवादी समूहों और दूसरे देशों से समर्थन मिल रहा है। उनके बयान पर भाजपा प्रमुख अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें हर चीज में षडयंत्र दिखता है। शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ममता को हर चीज में षडयंत्र दिखता है। उन्होंने भारतीय सेना के खिलाफ भी ऐसे ही आरोप लगाए थे।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन किया और वहां की स्थिति को लेकर उनसे चर्चा की। टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को पर्वतीय जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति सामान्य करने को लेकर राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। सिंह ने ममता से हरसंभव कदम उठाने को कहा ताकि  हिल स्टेशन पर शांति बहाल की जा सके जहां लोग स्कूलों में बंगाली भाषा को अनिवार्य कर उसे थोपे जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

जीजेएम ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ किसी भी तरह की बात करने से इंकार किया लेकिन कहा कि वह केंद्र में भाजपा नीत सरकार के साथ बात करने को लेकर सहज है। भाजपा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) की सहयोगी है और पार्टी के सांसद एस एस अहलुवालिया जीजेएम की मदद से 2014 का लोकसभा चुनाव जीते थे।  जीजेएम के नेता बिनय तमांग ने कहा, हम पश्चिम बंगाल सरकार के साथ वार्ता करने को तैयार नहीं है। ममता बनर्जी ने हमारा अपमान किया है उन्होंने हमें आतंकवादी कहा है।