मजबूत दिखने वाली टीम इंडिया को कमजोर पाक ने आखिर कैसे दी पटखनी

 
ग्वालियर/सचिन श्रीवास्तव। पाकिस्तान के खिलाफ पिछले दस में से 7 मैचों में जीत दर्ज करने वाली मजबूत टीम इंडिया को पाकिस्तान ने चैम्पियन्स ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में आसानी से पटखनी दे दी। आखिर क्या हुआ कि महान बल्लेबाजों से भरपूर टीम इंडिया मात्र 158 पर सिमट गई। जबकि इसी पिच पर पहले खेलते हुए कमजोर सी दिखने वाली पाकिस्तान टीम ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट पर 338 रन बनाए। आखिर क्यों भारतीय टीम की गेंदबाजी पाकिस्तानी बल्लेबाजों के सामने बोना साबित हुई। जबकि इस चैम्पियन्स ट्रॉफी के बाकि मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने उम्दा प्रदर्शन किया। आखिर क्या कारण हैं कि इस मैच के प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय टीम पर पाकिस्तान टीम भारी पड़ी। आखिर क्यों चैम्पियन दिखने वाली टीम फिसड्डी साबित हुई। ये सवाल इस समय 100 करोड़ हिन्दुस्तानी के मन में हैं। 
 
क्या संतुलित था अंतिम ग्यारह का चयन 
 
पिछले कई दिनों से खबर आ रही थी कि टीम इंडिया के मुख्य कोच अनिल कुंबले और टीम कप्तान विराट कोहली के बीच मतभेद चल रहा है। लेकिन चैम्पियन्स ट्रॉफी के शुरुआती मैचों में विराट ने यह कहकर कि कुंबले से कोई विवाद नहीं है इस चर्चा पर विराम लगा दिया था। लेकिन एक बार फिर चैम्पियन्स ट्रॉफी के फाइनल मैच में विवाद की झलक दिखाई देती नजर आई। जब मैच के लिए अंतिम ग्यारह की घोषणा की गई तब यह प्रश्न उठना लाजिमी था कि सपाट दिख रही पिच पर अश्विन की जगह उमेश यादव को अंतिम ग्यारह में जगह दी गई। जबकि टूर्नामेंट के पहले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ उमेश यादव ने अच्छा प्रदर्शन किया था। 
 
हाईवोल्टेज मैच में टॉस जीतने के बाद क्यों नहीं की पहले बल्लेबाजी
 
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जगत में भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा हमेशा रहा है। चाहे बिशन सिंह बेदी की कप्तानी के समय हो या फिर विराट कोहली की कप्तानी के समय। बड़े-बड़े गेंदबाजों ने हमेशा भारतीय बल्लेबाजों का लौहा माना है। ऐसे में रविवार को खेले गए चैम्पियन्स ट्रॉफी के फाइनल मैच में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली का टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला कुछ अचरज सा लगता है। जबकि हाईवोल्टेज मैच में भारतीय टीम पहले खेलकर 320-350 रन बनाकर पाकिस्तान पर दबाव बना सकती थी। जो दबाव स्वयं भारतीय टीम के बल्लेबाज महसूस कर रहे थे शायद वही स्थिती पाकिस्तान टीम की भी हो सकती थी।